बंगाल :- नए दिन की शुरुआत पश्चिम बंगाल के कई जिलों के लिए सामान्य नहीं रही क्योंकि सुबह दस बजकर दस मिनट पर अचानक धरती हिलने लगी। कोलकाता समेत आसपास के क्षेत्रों में महसूस किए गए इस भूकंप ने लोगों को घरों और दफ्तरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता पांच दशमलव सात दर्ज की गई जो मध्यम श्रेणी का भूकंप माना जाता है। लगभग सत्रह सेकेंड तक धरती लगातार कांपती रही और इस दौरान लोगों में डर और घबराहट दोनों बढ़ गए।
भूकंप के झटकों का केंद्र किस इलाके में था इसकी पुष्टि के लिए भू विज्ञान विभाग ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इसका प्रभाव बंगाल के कई जिलों में समान रूप से महसूस किया गया। कोलकाता में ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों ने सबसे ज्यादा कंपन को महसूस किया क्योंकि ऊंचाई पर झटके और भी अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। कई स्थानों पर लोग सुरक्षा के लिए खुले क्षेत्रों में चले गए और कुछ समय तक इमारतों में वापस लौटने से परहेज करते रहे।
सौभाग्य से अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई है। प्रशासन ने राहत टीमों को सतर्क कर दिया है और सभी महत्वपूर्ण भवनों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। भूकंप के बाद बिजली की आपूर्ति संचार नेटवर्क और यातायात पर भी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल का यह क्षेत्र आमतौर पर भूकंपीय गतिविधियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील नहीं माना जाता लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हल्के झटकों की संख्या बढ़ी है जो पृथ्वी की स्थिरता में आ रहे बदलावों की ओर संकेत करता है। ऐसे में लोगों को भूकंप के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाएं बिना चेतावनी आती हैं और सतर्कता ही सर्वोत्तम सुरक्षा है।