नई दिल्ली :- एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता ने खतरनाक मोड़ ले लिया है और हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया है जहां ए क्यू आई 548 दर्ज किया गया है जो गंभीर श्रेणी में आता है। यह स्तर मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है और विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे हालात में स्वस्थ व्यक्ति भी सांस से जुड़ी समस्याओं का सामना कर सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है और स्कूलों के समय में भी बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है।
एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं जिनमें निर्माण गतिविधियां औद्योगिक धुआं बढ़ती वाहन संख्या और मौसम की स्थिर स्थिति प्रमुख हैं। हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ही ठहर जाते हैं जिससे सांस लेना और भी कठिन हो जाता है। कई क्षेत्रों में दृश्यता भी प्रभावित होने लगी है जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर के प्रदूषण में बुजुर्ग बच्चों गर्भवती महिलाओं और दमा के मरीजों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
गाजियाबाद के अलावा नोएडा गुरुग्राम फरीदाबाद और दिल्ली के कई हिस्सों में भी वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। स्थानीय लोग लगातार गले में जलन आंखों में खुजली और भारीपन जैसी समस्याएं महसूस कर रहे हैं। अस्पतालों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है जो स्थिति की भयावहता को दर्शाता है।
सरकारी एजेंसियों ने प्रदूषण रोकने के लिए पानी का छिड़काव कचरा जलाने पर सख्त रोक और निर्माण स्थलों पर कवर लगाने जैसे कदम उठाए हैं पर विशेषज्ञ मानते हैं कि हालात में सुधार के लिए लंबे समय तक टिकाऊ कदम उठाना जरूरी है। लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कारपूलिंग मास्क का उपयोग और अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचने की आवश्यकता है ताकि इस गंभीर संकट का मुकाबला मिलकर किया जा सके।