Coaching centres नई दिल्ली: देश में कोचिंग सेंटरों के तेजी से बढ़ते कारोबार और इससे जुड़े सामाजिक मुद्दों पर संसदीय समिति ने जांच शुरू की है। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल पर स्थायी समिति ने कोचिंग सेंटरों के प्रसार, इसके सामाजिक प्रभाव और मौजूदा कानूनों की समीक्षा करने का फैसला किया है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई के दबाव के कारण छात्रों के आत्महत्या करने के मामले बढ़ रहे हैं। राजस्थान के कोटा शहर जिसे “कोचिंग कैपिटल ऑफ इंडिया” कहा जाता है में ऐसे कई मामले सामने आए हैं । संसदीय समिति ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा जनवरी में जारी कोचिंग सेंटरों के लिए गाइडलाइंस की भी समीक्षा करने का फैसला किया है। मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों के लिए बुनियादी ढांचे और सुरक्षा संबंधी मानकों को निर्धारित किया है।
कोचिंग सेंटरों के बढ़ते कारोबार के कारण
– छात्रों की बढ़ती संख्या और प्रतिस्पर्धा
– शिक्षा प्रणाली में खामियां
– कोचिंग सेंटरों के लिए कम नियमन
संसदीय समिति की जांच के दायरे में
– कोचिंग सेंटरों का प्रसार और सामाजिक प्रभाव
– मौजूदा कानूनों की समीक्षा
– शिक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस की समीक्षा
– छात्रों के आत्महत्या के मामलों की जांच
यह जांच शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।