पूर्वी अफ्रीकी देश इथियोपिया में हजारों वर्षों से शांत पड़े ज्वालामुखी के अचानक फटने से पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मच गई है। इस भीषण विस्फोट ने न केवल स्थानीय भूभाग को प्रभावित किया बल्कि इसकी राख का विशाल गुबार तेजी से वातावरण में फैलकर हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ज्वालामुखीय राख की परत हवा की तेज धाराओं के साथ मिलकर अब भारत के प्रमुख शहर दिल्ली और मुंबई तक पहुंच चुकी है जिससे वायु गुणवत्ता और भी खराब हो गई है।
ज्वालामुखी से निकली राख बेहद सूक्ष्म कणों से बनी होती है जो वातावरण में लंबे समय तक तैर सकती है। यह कण हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों के साथ मिलकर खतरनाक मिश्रण तैयार कर देते हैं जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दिल्ली और मुंबई में पहले से ही प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है और इस राख के पहुंचने से हवा और अधिक घनी और दमघोंटू महसूस होने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राख सूरज की रोशनी को भी बाधित करती है जिससे दिन के समय भी धुंध जैसी स्थिति बन सकती है।
इथियोपिया में इस विस्फोट के कारण कई गांवों को खाली कराया गया है। लावा प्रवाह और राख की बारिश ने फसलों और घरों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई क्षेत्रों में बिजली पानी और संचार सेवाएं बाधित हो गई हैं और स्थानीय प्रशासन राहत कार्य में जुटा हुआ है। वैज्ञानिक लगातार ज्वालामुखी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि अभी भी छोटे झटके और धुआं निकलने की घटनाएं जारी हैं।
भारत में मौसम विभाग ने सलाह जारी करते हुए कहा है कि जिन इलाकों में हवा की गुणवत्ता अचानक बिगड़ सकती है वहां लोग बाहर निकलते समय मास्क पहनें और बच्चों तथा बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यदि वातावरण में राख की मात्रा बढ़ती है तो उड़ानों पर भी प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि ऐसे कण विमान इंजनों के लिए खतरनाक होते हैं। फिलहाल दोनों देशों के वैज्ञानिक इस प्राकृतिक आपदा के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं और इसके संभावित दीर्घकालिक परिणामों को समझने की कोशिश में लगे हुए हैं।