मथुरा (उत्तर प्रदेश):- गौरीगोपाल आश्रम में एक वृद्ध और असहाय महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने पूरे क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। महिला का कहना है कि आश्रम में रहने के दौरान उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उसे ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा जिसकी किसी धार्मिक या सेवा संस्था में कल्पना भी नहीं की जा सकती। महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि आश्रम की एक महिला और एक पुरुष कर्मचारी ने उसके कानों से बाली छीन ली और उसके पास मौजूद नकदी भी ले ली। इतना ही नहीं आरोप है कि उसके साथ मारपीट की गई और फिर उसे सुदामा कुटी के पास निर्जन स्थान पर फेंक दिया गया।
यह घटना सामने आते ही आश्रम प्रशासन के कार्यकलापों पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां आश्रमों को जरूरतमंदों की सेवा और सुरक्षा के लिए जाना जाता है वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं इन संस्थाओं की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुंचाती हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
वृद्ध महिला की स्थिति देखकर लोग भावुक भी हो रहे हैं और आक्रोशित भी। समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा और सम्मान एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर किया है कि जिन आश्रमों में शरण और शांति की उम्मीद की जाती है वहां यदि उत्पीड़न होने लगे तो पीड़ित जाएं कहां। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और प्रशासन से उम्मीद है कि सच सामने लाया जाएगा और पीड़ित महिला को न्याय दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी।