Religious ego नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि सैनिकों का धार्मिक अहंकार सशस्त्र बलों के सामूहिक आह्वान को नहीं हरा सकता। यह निर्णय एक क्रिश्चियन सेना अधिकारी के मामले में आया है जिसने अपने रेजिमेंट के धार्मिक समारोहों में भाग लेने से इनकार कर दिया था। लाइंटनेंट सैमुअल कामलेसन ने अपने रेजिमेंट के सिख स्क्वाड्रन में शामिल होने के बाद भी धार्मिक समारोहों में भाग लेने से इनकार कर दिया था। उसने दावा किया था कि उसका धर्म उसे अन्य धर्मों के समारोहों में भाग लेने की अनुमति नहीं देता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उसके इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि एक सैनिक का धार्मिक अहंकार सशस्त्र बलों के सामूहिक आह्वान को नहीं हरा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सैनिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है लेकिन उन्हें अपने साथियों की भावनाओं का भी सम्मान करना होगा। कोर्ट ने कहा कि कामलेसन का व्यवहार सशस्त्र बलों के सामूहिक आह्वान के विरुद्ध है और यह उनके साथियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि सैनिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है लेकिन उन्हें अपने साथियों की भावनाओं का भी सम्मान करना होगा और सशस्त्र बलों के सामूहिक आह्वान को प्राथमिकता देनी होगी।