धर्मेंद्र की विदाई और भारतीय सिनेमा में उनकी अमर छाप

मुंबई (महाराष्ट्र):- भारतीय सिनेमा के जगमगाते सितारे धर्मेंद्र के निधन ने पूरे देश को गहरे दुःख में डूबो दिया है। बीते 24 नवंबर 2025 की सुबह मुंबई के जुहू स्थित उनके आवास से आई यह खबर हर उस व्यक्ति के लिए स्तब्ध करने वाली थी जिसने हिंदी फिल्मों के स्वर्ण युग को करीब से महसूस किया है। धर्मेंद्र अपनी 90वीं वर्षगांठ से केवल कुछ हफ्ते दूर थे पर नियति ने उनसे एक और जश्न का अवसर छीन लिया। उनकी मौत ने यह एहसास दिलाया कि एक युग सचमुच समाप्त हो गया है।

धर्मेंद्र को हिंदी फिल्म उद्योग में हीमैन की उपाधि मिली थी और उनका यह व्यक्तित्व पर्दे से बाहर भी उतना ही सजीव था। साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने अनेक चुनौतियों को पार किया और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण से फिल्मी दुनिया में वह मुकाम हासिल किया जिसकी कल्पना भी कठिन है। एक्शन हो या रोमांस या फिर भावनात्मक दृश्य वह हर किरदार में इतनी सहजता से ढल जाते थे कि दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगते थे।

उनकी हिट फिल्मों की लंबी फहरिस्त ने उन्हें सदाबहार नायक की श्रेणी में स्थापित किया। शोले सीता और गीता धर्मवीर और चुपके चुपके जैसी अनेक फिल्मों ने उन्हें घर घर में लोकप्रिय बनाया। उनकी मुस्कान उनकी संवाद अदायगी और उनकी स्क्रीन उपस्थिति ने दर्शकों को दशकों तक मंत्रमुग्ध रखा। उनकी यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

उनकी निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रहती थी मगर उन्होंने हर परिस्थिति में धैर्य और सादगी बनाए रखी। पारिवारिक मूल्यों के प्रति उनकी आस्था और लोगों से जुड़ने की उनकी क्षमता ने उन्हें न केवल एक महान कलाकार बल्कि एक अद्भुत इंसान भी बनाया।

धर्मेंद्र का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। परन्तु उनके द्वारा रचा गया गौरवशाली इतिहास हमेशा जीवित रहेगा और उनका नाम सदैव सम्मान और प्रेम के साथ याद किया जाएगा।

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