नई दिल्ली :-देश में अधूरी पड़ी आवासीय परियोजनाओं ने लाखों लोगों को लंबे समय से चिंता में डाल रखा था और कई परिवार अपने सपनों के घर की प्रतीक्षा में वर्षों से परेशान थे। इस चुनौती को खत्म करने के लिए सरकार अब एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है जिससे उन घर खरीदारों को राहत मिल सकेगी जिनकी परियोजनाएं धन की कमी या प्रबंधन की कमजोरियों के कारण रुक गई थीं। सरकार का यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में भरोसा बढ़ाने और फंसे हुए प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी रियल एस्टेट कंपनी की किसी परियोजना का कोई हिस्सा जैसे एक टावर या कुछ फ्लैट्स धन की कमी के कारण अधूरे रह जाते हैं तो दिवाला प्रक्रिया अब पूरी कंपनी पर लागू नहीं की जाएगी। इसके स्थान पर दिवाला कार्यवाही केवल उस हिस्से पर लागू होगी जो वास्तव में अटका हुआ है। इससे कंपनी की अन्य परियोजनाएं प्रभावित नहीं होंगी और खरीदारों की उम्मीदें भी जीवित रहेंगी। यह प्रणाली उन बड़ी कंपनियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है जिनके कुछ प्रोजेक्ट फंस जाते हैं लेकिन बाकी कामकाज सुचारू रूप से चलता रहता है।
इस बदलाव से घर खरीदारों को कई तरह की सुरक्षा मिलेगी। पहले जब पूरी कंपनी दिवाला प्रक्रिया में जाती थी तो सभी परियोजनाएं रुक जाती थीं और खरीदारों के पैसे और समय दोनों पर भारी जोखिम पैदा हो जाता था। अब केवल अटके हुए हिस्से पर कार्रवाई होने से बाकी परियोजनाएं चलती रहेंगी और घर खरीदारों को अपने फ्लैट मिलने की संभावना अधिक मजबूत होगी। साथ ही नई व्यवस्था से बैंकों और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा क्योंकि उनके निवेश पर अनिश्चितता कम होगी।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सेक्टर को स्थिरता देगा और फंसी हुई परियोजनाओं को गति मिलेगी। घर खरीदारों के लिए यह नई उम्मीद का द्वार है और आने वाले समय में इससे पूरे आवासीय बाजार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।