नई दिल्ली :- भारतीय क्रिकेट में हाल के दिनों में कई बदलाव देखने को मिले हैं और इन्हीं में सबसे चर्चित नाम है मुख्य कोच गौतम गंभीर। साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली कड़ी हार ने टीम और प्रशंसकों दोनों को झटका दिया है लेकिन गंभीर ने इस दौर में भी संयम बनाए रखा है। उन्होंने साफ कहा कि उनके पद की चिंता से ज्यादा महत्वपूर्ण भारतीय क्रिकेट की प्रतिष्ठा और उसकी निरंतर प्रगति है।
गंभीर ने अपने बयान में कहा कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं और आगे भी भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके भविष्य का निर्णय बीसीसीआई के हाथ में है और वे संस्था के हर निर्णय का सम्मान करेंगे। गंभीर का यह रवैया बताता है कि वे अपने पद की गरिमा को समझते हैं और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर राष्ट्रीय खेल को रखते हैं।
टीम इंडिया में हाल के दौर में कई युवाओं को मौका दिया गया है जिनके अनुभव की कमी विदेश में उभर कर सामने आई है। गंभीर का मानना है कि ऐसी चुनौतियां टीम को मजबूत बनाती हैं और असफलताएं उन क्षेत्रों की ओर संकेत करती हैं जहां सुधार की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि सफलता और विफलता दोनों एक ही यात्रा के हिस्से हैं और कोच के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि वे टीम को दोनों परिस्थितियों में संभालें।
बीसीसीआई गंभीर के कार्यकाल और उनकी रणनीतियों का मूल्यांकन कर रही है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर की सोच और नेतृत्व शैली भारतीय टीम के लिए लंबे समय में बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय बोर्ड ही करेगा लेकिन गंभीर के इस वक्तव्य ने यह साफ कर दिया है कि उनके लिए व्यक्तिगत पद नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है।