नई दिल्ली :- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक अहम शैक्षणिक सुधार करते हुए कक्षा छह से आठ तक कौशल शिक्षा को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। बोर्ड का कहना है कि बच्चों के समग्र विकास के लिए केवल पाठ्यपुस्तक आधारित ज्ञान पर्याप्त नहीं होता बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन से जुड़े कौशल भी आने चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर और व्यावहारिक सोच वाले बन सकें।
इस नई व्यवस्था के तहत छात्रों को विभिन्न प्रकार के बुनियादी और उपयोगी कौशल सिखाए जाएंगे जिनमें पौधों की देखभाल सरल यांत्रिक कार्य घरेलू मरम्मत कौशल जल संरक्षण तकनीक ऊर्जा बचत के तरीके प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा और साधारण हस्तकला शामिल होगी। इसका उद्देश्य छात्रों को किताबों के बाहर की दुनिया से जोड़ना है ताकि वे यह समझ सकें कि दैनिक जीवन में कौन सी चीजें कैसे काम करती हैं और उन्हें संभालने के लिए किस तरह की दक्षता की आवश्यकता होती है।
शिक्षकों को भी इस बदलाव के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे छात्रों को प्रायोगिक और गतिविधि आधारित तरीकों से पढ़ा सकें। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कौशल शिक्षा को पारंपरिक विषयों की तरह बोझ नहीं बनाया जाएगा बल्कि इसे रोचक और रचनात्मक तरीके से लागू किया जाएगा। स्कूलों को अपने संसाधनों के अनुसार गतिविधियों की योजना बनाने और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक कौशल चयन की अनुमति भी दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को लंबे समय से चली आ रही उस कमी को दूर करेगा जिसमें बच्चों को केवल परीक्षा केंद्रित ज्ञान दिया जाता था। अब बच्चे कम उम्र से ही जिंदगी के उपयोगी कौशल सीख पाएंगे जिससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा बल्कि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए भी बेहतर तैयार होंगे।
सीबीएसई का यह फैसला शिक्षा के व्यावहारिक स्वरूप को मजबूत करने और छात्रों को वास्तविक जीवन के लिए सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।