SC ask नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के उस फैसले पर सवाल उठाया है जिसमें शिक्षकों को बूथ-लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के रूप में तैनात किया गया है और उन्हें मतदाताओं की नागरिकता तय करने की जिम्मेदारी दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह फैसला “खतरनाक और अनुचित” है और बीएलओ को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि नागरिकता तय करना केवल गृह मंत्रालय का काम है और बीएलओ को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह फैसला मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और उन्हें अपने मताधिकार से वंचित कर सकता है। चुनाव आयोग ने तर्क दिया है कि बीएलओ केवल मतदाता सूची की शुद्धता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हैं और उन्हें नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। हालांकि याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह तर्क सही नहीं है और बीएलओ को नागरिकता तय करने का अधिकार देना अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 2 दिसंबर की तारीख तय की है।