Export curbs नई दिल्ली:- भारत के स्टील उद्योग को एक बड़ा झटका लगा है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यूरोपीय संघ (ईयू) ने अपने यहां से फेरस स्क्रैप के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। लौह स्क्रैप (Ferrous scrap) लोहे और इस्पात के पुराने और बेकार हो चुके उत्पादों से प्राप्त होता है स्टील उत्पादन में एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। भारत अपनी स्टील उत्पादन की जरूरतों का लगभग 25% आयातित लौह स्क्रैप पर निर्भर है जो लगभग 8-10 मिलियन टन प्रति वर्ष है। यह आयात मुख्य रूप से यूएई, ईयू, और अन्य देशों से किया जाता है। लौह स्क्रैप का उपयोग स्टील उत्पादन में ऊर्जा की बचत करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है इसलिए यह स्टील उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
भारत की स्टील उत्पादन क्षमता 2030 तक 300 मिलियन टन तक पहुंचने का लक्ष्य है लेकिन देश में स्क्रैप की कमी के कारण यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने देश में स्क्रैप उत्पादन बढ़ाने के लिए वाहन स्क्रैपिंग नीति और रीसाइक्लिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके अलावा सरकार ने स्टील उत्पादन में स्क्रैप के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) स्टीलमेकिंग को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। यह प्रतिबंध भारत के स्टील उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है लेकिन सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए हैं। उम्मीद है कि सरकार के इन कदमों से भारत का स्टील उद्योग इस चुनौती का सामना करने में सक्षम होगा।