केंद्र सरकार का पेंशन रिव्यू मॉडल एक महीने से सुर्खियों में

नई दिल्ली :- पिछले एक महीने से यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। 3 नवंबर को सरकार ने इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए थे, जिसके बाद से कर्मचारियों और पेंशनरों में कई सवाल उठने लगे हैं। सरकार के इस फैसले के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि नए मॉडल में पेंशन की गणना कैसे होगी, पुरानी पेंशन योजना (OPS) और नई पेंशन प्रणाली (NPS) में क्या बदलाव आएंगे, और इसका सीधा असर कर्मचारियों की रिटायरमेंट सुरक्षा पर किस तरह पड़ेगा।

कर्मचारियों और पेंशनरों की मुख्य चिंताएँ

  • क्या सरकार OPS जैसी गारंटीड पेंशन देने की दिशा में कदम उठा रही है?
  • NPS की रिटर्न गारंटी और मार्केट रिस्क को लेकर क्या संशोधन किए जाएंगे?
  • पेंशन राशि क्या वेतन की निश्चित प्रतिशत पर आधारित होगी?
  • मृत्यु के बाद परिवार पेंशन में क्या बदलाव होंगे?
  • क्या नए मॉडल का लाभ पहले से रिटायर कर्मचारियों को मिलेगा?

सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि ToR जारी करने का उद्देश्य एक ऐसी पेंशन प्रणाली तैयार करना है जो वित्तीय रूप से टिकाऊ, कर्मचारियों के लिए भरोसेमंद और लंबे समय तक चलने वाली हो। समिति को छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

 

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