नई दिल्ली :- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चार वर्ष से अधिक समय के बाद भारत की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा गुरुवार शाम शुरू की। यह यात्रा इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत और रूस दोनों अपने रणनीतिक साझेदारी को नए स्वरूप में मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जैसे ही पुतिन का विमान 4 दिसंबर की शाम दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा वैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं प्रोटोकॉल से इतर जाकर उनका स्वागत करने पहुंचे। यह gesture दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता और उच्च स्तर के विश्वास को दर्शाता है।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच विस्तृत वार्ता होने की संभावना है जिसमें रक्षा ऊर्जा व्यापार और भू रणनीतिक मुद्दों पर विशेष चर्चा होगी। भारत और रूस दशकों से रक्षा सहयोग में मजबूत साथी रहे हैं और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए यह सहयोग और भी अहम हो जाता है। उम्मीद है कि दोनों नेता आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर बात करेंगे।
कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यह दौरा न केवल दोनों देशों के राजनीतिक समीकरणों को मजबूती देगा बल्कि आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को भी नई गति प्रदान करेगा। वैश्विक तनावों और शक्ति संतुलन के दौर में भारत और रूस एक दूसरे के लिए विश्वसनीय साझेदार साबित हुए हैं। ऐसे में पुतिन की यह यात्रा आगामी वर्षों में आपसी संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करने वाली मानी जा रही है।
यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि भारत और रूस अपनी बहुपक्षीय रणनीति को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक मित्रता को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए तैयार हैं।