India’s rare disease : दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नीतिगत देरी की भारी कीमत

India’s rare disease नई दिल्ली: भारत में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए नीतिगत देरी एक बड़ी समस्या बन गई है। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत आवंटित धनराशि का उपयोग नहीं किया जा रहा है जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई है।

नीतिगत देरी के कारण बिगड़ते हालात

दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए सरकार की ओर से एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है लेकिन यह राशि पर्याप्त नहीं है। मरीजों को इलाज के लिए भारी भरकम खर्च करना पड़ता है जिससे उनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार को दुर्लभ रोगों के इलाज के लिए एक राष्ट्रीय निधि स्थापित करनी चाहिए और इसके लिए 974 करोड़ रुपये का आवंटन करना चाहिए।

मरीजों की स्थिति

दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। कई मरीजों की मौत हो चुकी है जबकि कई मरीज अभी भी इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। मरीजों के परिवारों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए।

सरकार से अपील

दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के परिवारों ने सरकार से अपील की है कि वह जल्द से जल्द राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति को लागू करे और मरीजों को इलाज के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करे। मरीजों के परिवारों ने सरकार से यह भी अपील की है कि वह दुर्लभ रोगों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

आंकड़े

– भारत में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लाखों में है।

– दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत आवंटित धनराशि का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

– दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है।

– मरीजों के परिवारों को इलाज के लिए भारी भरकम खर्च करना पड़ता है जिससे उनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं।

सरकार की जिम्मेदारी

सरकार की जिम्मेदारी है कि वह दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करे। सरकार को जल्द से जल्द राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति को लागू करना चाहिए और मरीजों को इलाज के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करनी चाहिए।

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