नई दिल्ली :- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने हाल ही में अपनी पेंशन योजना EPS पर एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है जिससे लाखों कर्मचारियों की शंकाएं दूर हो सकें। अक्सर सैलरीड कर्मचारी इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि क्या हर EPF मेंबर EPS यानी Employees Pension Scheme में योगदान कर सकता है या नहीं। EPFO के अनुसार EPS में वही कर्मचारी शामिल हो सकते हैं जिनका मासिक वेतन पंद्रह हजार रुपये तक है और जो EPF मेंबर के रूप में सक्रिय हैं। यदि किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन और डीए मिलाकर पंद्रह हजार रुपये से अधिक है तो वह स्वतः EPS का सदस्य नहीं बनता।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का लाभ देना है ताकि उनके बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा बनी रहे। EPS के तहत नियोक्ता यानी एम्प्लॉयर द्वारा EPF योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा पेंशन फंड में जमा किया जाता है जबकि कर्मचारी का पूरा योगदान EPF खाते में जाता है। इस योजना में कम से कम दस वर्ष की सेवा आवश्यक होती है ताकि कर्मचारी पेंशन के लिए पात्र बन सके।
EPFO ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों ने 2014 से पहले EPS में योगदान शुरू किया था और बाद में उनका वेतन सीमा से अधिक हो गया उन्हें योजना में बने रहने की अनुमति दी गई थी। लेकिन 2014 के बाद शामिल हुए उच्च वेतन वाले कर्मचारियों को EPS का लाभ नहीं मिलता जब तक वे इसके लिए विशेष आवेदन न करें। इस स्पष्टीकरण के बाद कर्मचारियों को अपनी पात्रता और पेंशन योजना की शर्तों को ध्यानपूर्वक समझना चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह की असुविधा न हो।