नई दिल्ली :- आज के समय में कैंसर एक ऐसी बीमारी बन गई है जो तेज़ी से फैलती दिखाई दे रही है। कई लोग इसे बुखार की तरह आम होता मानने लगे हैं क्योंकि इसकी पकड़ उम्र या जीवनशैली नहीं देखती। शरीर के भीतर किस हिस्से में कैंसर विकसित हो रहा है इसका पता अक्सर समय रहते नहीं लग पाता। यही कारण है कि जब तक बीमारी आगे बढ़ जाती है तब तक इलाज कठिन होता जाता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि लोग इसके शुरुआती संकेतों को पहचानें या समय समय पर जांच करवाएं।
कैंसर का सबसे बड़ा खतरा यही है कि इसके लक्षण शुरू में बहुत सामान्य दिखाई देते हैं जिन पर लोग ध्यान नहीं देते। लगातार थकान महसूस होना वजन का बिना किसी कारण घटना भूख में कमी या शरीर में किसी हिस्से में गांठ बनना जैसे संकेत अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। कई बार लगातार खांसी रहना गले में खराश ठीक न होना मल या मूत्र के तरीकों में बदलाव त्वचा पर असामान्य तिल का बड़ा होना या खून आने जैसे लक्षण भी शरीर में हो रहे बदलावों की ओर इशारा करते हैं।
शरीर अपने भीतर चल रही कई समस्याओं की जानकारी छोटे छोटे संकेतों के रूप में देता है। इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति इन संकेतों को गंभीरता से ले। किसी भी असामान्य परिवर्तन को हल्के में न लेते हुए तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना समझदारी है। समय पर जांच कराने से कैंसर को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ा जा सकता है और इलाज की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
कैंसर से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। स्वस्थ जीवनशैली संतुलित भोजन नियमित व्यायाम और तंबाकू जैसे हानिकारक पदार्थों से दूरी बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है। यदि लोग अपने शरीर की बात सुनें और समय रहते जांच करवाते रहें तो यह बीमारी भी काबू में आ सकती है। सावधानी जागरूकता और समय पर कदम उठाना ही कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।