नई दिल्ली :- साल 2025 निवेशकों के लिए यादगार साबित हुआ, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने सोने में भरोसा जताया था। वर्ष की शुरुआत से ही सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली और हर महीने दामों ने नया कीर्तिमान बनाया। दिल्ली सर्राफा बाजार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 60 फीसदी महंगा हुआ, जिसने निवेशकों को करीब 67 प्रतिशत तक का शानदार रिटर्न दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर इंडेक्स में गिरावट और कई देशों की मौद्रिक नीतियों में बदलाव के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर झुके। सोना सदियों से आर्थिक अस्थिरता के दौर में सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है और 2025 में यह बात एक बार फिर साबित हुई।
रूस–यूक्रेन तनाव, मध्य–पूर्व में बढ़ते भू–राजनीतिक जोखिम, तेल की कीमतों में उतार–चढ़ाव और कई देशों में मुद्रास्फीति बढ़ने जैसे कारणों ने भी सोने की मांग को बढ़ावा दिया। भारतीय बाजार में त्योहारी सीजन और विवाह समारोहों के दौरान रिकॉर्ड खरीदारी ने घरेलू दामों को और ऊपर पहुंचाया।
2025 में सोने की कीमतें जहां–जहां ऊंचाई पर पहुंचीं, वहीं निवेशकों ने भी इसका भरपूर फायदा उठाया। म्यूचुअल फंड, गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और भौतिक सोने—हर रूप में निवेशकों को मजबूत लाभ मिला। कई वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों ने वर्ष की शुरुआत में लंबी अवधि का निवेश किया, उनके पोर्टफोलियो में सोने ने सबसे अधिक स्थिरता और लाभ दिया।
अब सवाल यह है कि क्या 2026 में भी सोना यही प्रदर्शन दोहराएगा? विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार–चढ़ाव बरकरार रहता है और डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की चमक आने वाले वर्ष में भी कायम रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सतर्क रहकर बाजार पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।