नई दिल्ली :- सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। करीब दो मिनट इकतीस सेकेंड के इस वीडियो में एक युवती खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा बताते हुए कुछ गंभीर आरोप लगाती हुई नजर आती है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला अलग अलग प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बन गया है और यूजर्स अपनी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
वीडियो में युवती बताती है कि कुछ दिन पहले उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर के खिलाफ एक वीडियो पोस्ट किया था। युवती का कहना है कि उस पोस्ट के बाद उसे लगातार मानसिक दबाव और डर का सामना करना पड़ रहा है। वह यह भी दावा करती है कि उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है और उसे चुप रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग युवती के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे मामले की सच्चाई सामने आना जरूरी है। कई लोग यह भी कह रहे हैं कि ऐसे मामलों में संस्थानों को पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय या संबंधित प्रोफेसर की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे इस पर भी अभी स्थिति साफ नहीं है। हालांकि यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया के दौर में आरोप और जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में भावनाओं के बजाय तथ्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए। आरोप लगाने वाले और जिन पर आरोप लगाए गए हैं दोनों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो को अंतिम सच मान लेना सही नहीं होता।
फिलहाल यह वीडियो चर्चा में बना हुआ है और लोग आगे की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर क्या मोड़ आता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा।