नई दिल्ली :- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में बने माहौल को अपेक्षाकृत शांत बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मई के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका बढ़ गई थी। हालांकि इसके बाद कूटनीतिक स्तर पर परिस्थितियां धीरे धीरे संभलती नजर आईं और सीमाई हालात में भी कुछ हद तक स्थिरता आई है।
आईएमएफ का मानना है कि इस शांति का सीधा असर पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पाकिस्तान तनाव कम होने से पाकिस्तान से जुड़े बिजनेस रिस्क में गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों का भरोसा किसी भी देश की आर्थिक सेहत के लिए अहम होता है और हालिया घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच पाकिस्तान को लेकर फैले डर को कुछ हद तक कम किया है।
संगठन ने यह भी माना है कि क्षेत्रीय शांति से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना बनती है। जब सीमाओं पर तनाव घटता है तब लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन और कारोबारी फैसलों में स्थिरता आती है। इसका असर विदेशी निवेश घरेलू उद्योग और वित्तीय बाजारों पर सकारात्मक रूप से पड़ता है।
हालांकि आईएमएफ ने यह भी चेताया है कि यह सुधार स्थायी तभी हो सकता है जब राजनीतिक संवाद और भरोसे की प्रक्रिया लगातार जारी रहे। किसी भी तरह की नई तनातनी फिर से जोखिम बढ़ा सकती है और आर्थिक प्रगति को प्रभावित कर सकती है। पाकिस्तान के लिए जरूरी है कि वह आंतरिक आर्थिक सुधारों पर ध्यान दे और क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता बनाए रखे।
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में आई यह नरमी पूरे दक्षिण एशिया के लिए अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह माहौल बना रहता है तो न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे क्षेत्र में विकास और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इस रिपोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि शांति और आर्थिक स्थिरता एक दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।