नई दिल्ली :- भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि 1960 के दशक में चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए को भारत में एक संवेदनशील मिशन की अनुमति दी गई थी। उनके अनुसार यह अनुमति तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और बाद में इंदिरा गांधी के दौर में दी गई।
निशिकांत दुबे का कहना है कि इस मिशन के तहत हिमालय की नंदा देवी चोटी पर एक परमाणु जासूसी उपकरण लगाया गया था। आरोप है कि यह उपकरण चीन के परमाणु परीक्षणों और सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल होना था। उन्होंने इसे देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है और कहा है कि उस समय की सरकारों ने विदेशी एजेंसी को भारत के भीतर ऐसी गतिविधि की इजाजत देकर बड़ी चूक की।
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कांग्रेस नेताओं ने इन आरोपों को बेबुनियाद और इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाला बताया है। उनका कहना है कि उस दौर की परिस्थितियां अलग थीं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई फैसले गोपनीयता के दायरे में लिए जाते हैं। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि मौजूदा सरकार इतिहास के मुद्दों को उठाकर जनता का ध्यान वर्तमान समस्याओं से भटकाना चाहती है।
वहीं भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि देश को अपने अतीत के उन फैसलों को जानने का हक है जिनका असर राष्ट्रीय हितों पर पड़ा। समर्थकों का मानना है कि ऐसे मुद्दों पर खुली चर्चा से पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
नंदा देवी से जुड़ा यह मामला पहले भी किताबों और रिपोर्ट्स में चर्चा का विषय रहा है। अब एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी के कारण यह मुद्दा सुर्खियों में है और आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है।