Study identifies : भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजे रक्त में छिपे संकेत, जो बताते हैं मधुमेह और गुर्दे की बीमारी का खतरा

Study identifies नई दिल्ली: भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण खोज में रक्त में छिपे संकेतों की पहचान की है जो मधुमेह और गुर्दे की बीमारी के खतरे को पहले से ही बता सकते हैं। यह खोज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है जिन्होंने मेटाबोलोमिक्स तकनीक का उपयोग करके रक्त में मौजूद छोटे अणुओं का अध्ययन किया है।

क्या है मेटाबोलोमिक्स?

मेटाबोलोमिक्स एक ऐसी तकनीक है जिसमें रक्त में मौजूद छोटे अणुओं का अध्ययन किया जाता हैbजो शरीर की कोशिकाओं में होने वाली गतिविधियों को दर्शाते हैं। इस तकनीक का उपयोग करके वैज्ञानिक रक्त में छिपे संकेतों की पहचान कर सकते हैं जो बीमारियों के खतरे को पहले से ही बता सकते हैं।

कैसे किया गया अध्ययन?

वैज्ञानिकों ने 52 लोगों के रक्त के नमूनों का अध्ययन किया जिनमें 15 स्वस्थ लोग 23 मधुमेह के मरीज और 14 गुर्दे की बीमारी के मरीज शामिल थे। उन्होंने लिक्विड क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एलसी-एमएस) और गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (जीसी-एमएस) तकनीकों का उपयोग करके रक्त में मौजूद लगभग 300 अणुओं का अध्ययन किया।

क्या पाया गया?

वैज्ञानिकों ने पाया कि मधुमेह और गुर्दे की बीमारी के मरीजों में 26 अणुओं की मात्रा अलग-अलग थी। इनमें से सात अणुओं की मात्रा मधुमेह और गुर्दे की बीमारी के खतरे को पहले से ही बता सकती है। इन अणुओं में अरबिटोल, मायो-इनोसिटोल, रिबोथाइमिडीन और 2पीवाई शामिल हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

यह खोज मधुमेह और गुर्दे की बीमारी के खतरे को पहले से ही बताने में मदद कर सकती है जिससे समय पर इलाज किया जा सकता है। यह खोज भारतीय आबादी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में मधुमेह और गुर्दे की बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

आवश्यकता

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज को और आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर अध्ययन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह खोज मधुमेह और गुर्दे की बीमारी के इलाज में एक नए युग की शुरुआत कर सकती है।

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