नई दिल्ली :- सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाल के महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में जो तेज उछाल देखने को मिला है उसके पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का सीधा असर निवेशकों की सोच पर पड़ता है। जब दुनिया के अलग अलग हिस्सों में संघर्ष बढ़ता है या आर्थिक हालात कमजोर होते हैं तब निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित विकल्पों की तलाश करते हैं। ऐसे समय में सोना और चांदी सबसे भरोसेमंद निवेश माने जाते हैं।
सरकार के अनुसार वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ने से इक्विटी और अन्य जोखिम भरे निवेश विकल्पों में उतार चढ़ाव बढ़ गया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि लोग अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं। सोना लंबे समय से संकट के समय में स्थिरता का प्रतीक माना जाता रहा है। चांदी भी औद्योगिक उपयोग और निवेश दोनों कारणों से मांग में बनी रहती है।
आर्थिक अनिश्चितता के दौर में महंगाई का डर भी निवेशकों को प्रभावित करता है। जब मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका होती है तब कागजी मुद्रा की तुलना में सोने और चांदी को अधिक सुरक्षित माना जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ने के साथ साथ घरेलू बाजार में भी इनकी कीमतें ऊपर गई हैं।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक घटनाक्रमों से जुड़ी हुई है। आने वाले समय में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य होते हैं और आर्थिक स्थिरता लौटती है तो कीमतों में कुछ संतुलन देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों को सोच समझकर फैसला लेने और बाजार के रुझान पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।