नई दिल्ली :- संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मनरेगा योजना को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। सरकार की ओर से मनरेगा से जुड़ा नया कानून लाने और इसके नाम में बदलाव की चर्चा पर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में भावुक और तीखा भाषण दिया जिसने सदन का ध्यान खींचा।
प्रियंका गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी उनके परिवार से नहीं हैं लेकिन वे पूरे देश के हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महात्मा गांधी का नाम किसी एक दल या परिवार की विरासत नहीं बल्कि भारत की आत्मा से जुड़ा हुआ है। मनरेगा का नाम बदलने की कोशिश को उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों और योगदान का अपमान बताया।
उन्होंने सदन में कहा कि मनरेगा पिछले बीस वर्षों से ग्रामीण भारत के लिए जीवनरेखा साबित हुआ है। इस योजना ने करोड़ों गरीब परिवारों को रोजगार दिया और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की। कठिन समय में यह योजना ग्रामीण मजदूरों के लिए सहारा बनी है और इससे पलायन पर भी रोक लगी है।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस योजना को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नाम बदलना केवल शुरुआत है असली मंशा इसे धीरे धीरे खत्म करने की है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर योजना इतनी सफल रही है तो सरकार को इससे परेशानी क्यों है।
विपक्षी दलों ने भी प्रियंका गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मनरेगा सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार है। उनका कहना था कि रोजगार का अधिकार गरीबों का हक है और इसे किसी भी हालत में छीना नहीं जाना चाहिए।
सरकार की ओर से हालांकि इस पर सफाई दी गई लेकिन विपक्ष संतुष्ट नजर नहीं आया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनरेगा का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। प्रियंका गांधी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और सड़क से संसद तक विरोध जारी रहेगा।