Caste equations पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और जातिगत समीकरण और कल्याणकारी योजनाएं चुनावी रणनीति का केंद्र बिंदु बन गई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन दोनों ही जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवारों का चयन कर रहे हैं।
जातिगत समीकरण
बिहार में जातिगत समीकरण हमेशा से ही चुनावी राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। एनडीए में शामिल जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने अपनी जाति के वोट बैंक को मजबूत करने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। वहीं महागठबंधन में शामिल राजद नेता तेजस्वी यादव अपनी जाति के वोट बैंक को मजबूत करने के लिए युवाओं को रोजगार देने का वादा कर रहे हैं।
कल्याणकारी योजनाएं
बिहार में कल्याणकारी योजनाएं भी चुनावी राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। एनडीए सरकार ने महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं जैसे कि महिलाओं को मुफ्त साइकिल और स्कूटी देने की योजना। वहीं महागठबंधन ने युवाओं को रोजगार देने और किसानों को कर्ज माफी का वादा किया है।
चुनावी रणनीति
बिहार में चुनावी रणनीति बहुत ही जटिल है। दोनों ही गठबंधन जातिगत समीकरणों और कल्याणकारी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवारों का चयन कर रहे हैं। एनडीए ने अपने उम्मीदवारों का चयन जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए किया है वहीं महागठबंधन ने अपने उम्मीदवारों का चयन युवाओं और किसानों को ध्यान में रखते हुए किया है।