नई दिल्ली :- दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हल्का सुधार दर्ज होने के बावजूद हवा अब भी दमघोंटू बनी हुई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने GRAP 4 के तहत सख्त पाबंदियां लागू कर रखी हैं लेकिन इसके बावजूद आम लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही। सुबह से ही आसमान में धुंध की मोटी चादर छाई रहती है जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई है और सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो गया है।
प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बच्चों बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो रही है। अस्पतालों में खांसी दमा और आंखों में जलन की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहना फेफड़ों और हृदय के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
GRAP 4 के तहत निर्माण कार्यों पर रोक भारी वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध और स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद प्रदूषण के स्तर में अपेक्षित गिरावट नहीं आ पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने स्थानीय प्रदूषण स्रोतों और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। हवा की गति कम होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंसे हुए हैं।
प्रदूषण का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा है। कम दृश्यता के कारण कई उड़ानों में देरी हुई है और कुछ को रद्द तक करना पड़ा है। यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है जिससे असुविधा और बढ़ गई है। सड़क परिवहन भी प्रभावित हुआ है क्योंकि धुंध के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
सरकार और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। मास्क का इस्तेमाल करने और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। जब तक मौसम में बड़ा बदलाव नहीं आता तब तक दिल्ली एनसीआर को इस जहरीली हवा से राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।