नई दिल्ली :- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने मंगलवार को भारतीय सेना में सैनिकों की अधिक संख्या को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि कुछ सैनिकों को अन्य कामों में लगाया जा सकता है। चव्हाण का मानना है कि वर्तमान और भविष्य के युद्ध परिदृश्य में हवाई ताकत और मिसाइल प्रणाली की भूमिका प्रमुख होगी और इसलिए सेना की संख्या पर नई रणनीति अपनाई जानी चाहिए।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अभियान स्पष्ट रूप से दिखाता है कि आने वाले समय के संघर्ष भूमि पर सीधे लड़ाई की तुलना में हवाई और तकनीकी साधनों पर आधारित होंगे। ऐसे में केवल भारी संख्या में सैनिक तैनात करना प्रभावी रणनीति नहीं माना जा सकता।
पृथ्वीराज चव्हाण ने यह भी कहा कि सैनिकों को सामाजिक और आपातकालीन कार्यों में लगाया जा सकता है ताकि उनकी विशेषज्ञता और क्षमता का अधिकतम उपयोग हो सके। उनका सुझाव है कि सेना का ढांचा समय की जरूरतों के अनुसार बदलना चाहिए ताकि रक्षा प्रणाली अधिक प्रभावी और लचीली बन सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि चव्हाण के बयान से रक्षा रणनीति और संसाधनों के प्रबंधन पर नई बहस शुरू हो सकती है। भारतीय सेना की भूमिका केवल जमीन पर लड़ाई तक सीमित नहीं है बल्कि आधुनिक युद्ध तकनीक और रणनीति के अनुसार सशक्त और आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर जोर देना आवश्यक है।
इस बयान के बाद राजनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों के बीच विवाद और चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और सेना इस सुझाव पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और क्या भविष्य में सेना की संरचना में कोई बदलाव होता है।