नई दिल्ली :- ऑपरेशन सिंदूर के सात महीने बाद भी पाकिस्तान का मुरीद एयरबेस चर्चा में बना हुआ है। सैटेलाइट तस्वीरों और जमीनी सूचनाओं के अनुसार इस एयरबेस के कई हिस्से तिरपाल से ढके हुए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यहां अब भी नुकसान के निशान मौजूद हैं और मरम्मत का काम पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद यह एयरबेस लंबे समय तक निष्क्रिय रहा जिसने पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों पर असर डाला।
मुरीद एयरबेस पाकिस्तान एयरफोर्स के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। यहां से निगरानी और लड़ाकू अभियानों को संचालित किया जाता रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए हमले ने इस ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई। विशेषज्ञों का मानना है कि तिरपाल से ढकना केवल मरम्मत नहीं बल्कि नुकसान को छिपाने की कोशिश भी हो सकती है। अंदर क्या चल रहा है इस पर पाकिस्तानी सेना की चुप्पी संदेह को और बढ़ाती है।
सूत्रों के मुताबिक एयरबेस पर कुछ हैंगर और रनवे सेक्शन अभी भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं। उपकरणों की मरम्मत और सुरक्षा इंतजामों को नए सिरे से खड़ा किया जा रहा है। इससे यह साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर का असर अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक रहा है। पाकिस्तान को न केवल सैन्य नुकसान उठाना पड़ा बल्कि उसकी रणनीतिक क्षमता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
भारत में इस घटनाक्रम को एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आतंकवाद को समर्थन देने की कीमत क्या हो सकती है यह ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया। सुरक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि ऐसे अभियानों से न केवल ढांचे को नुकसान पहुंचता है बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनता है।
मुरीद एयरबेस पर तिरपाल के नीचे छुपी सच्चाई चाहे जो हो लेकिन इतना तय है कि ऑपरेशन सिंदूर का दर्द पाकिस्तान अब तक महसूस कर रहा है। यही कारण है कि यह मुद्दा आज भी क्षेत्रीय सुरक्षा बहस के केंद्र में बना हुआ है।