नई दिल्ली :-दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए शुरू किए गए नो पीयूसी नो फ्यूल अभियान का पहला दिन काफी चर्चा में रहा। राजधानी के अलग अलग इलाकों में इसका मिला जुला असर देखने को मिला। कुछ पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही लंबी कतारें लगी नजर आईं तो कई जगह अपेक्षाकृत सन्नाटा दिखा। लोग अपने वाहनों के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र बनवाने में जुटे रहे।
पहले ही दिन प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी करने की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ। आंकड़ों के अनुसार एक ही दिन में 31197 पीयूसी प्रमाणपत्र बनाए गए जो पिछले दिनों की तुलना में कहीं अधिक हैं। इससे साफ है कि अभियान का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है और वे नियमों का पालन करने को मजबूर हुए हैं।
कई वाहन चालकों ने बताया कि उन्हें अचानक नियम लागू होने की जानकारी मिली जिसके कारण पेट्रोल पंप पर परेशानी का सामना करना पड़ा। जिनके पास वैध पीयूसी नहीं था उन्हें ईंधन नहीं दिया गया। इससे कुछ लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। वहीं कई लोगों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया और इसे प्रदूषण कम करने की दिशा में जरूरी बताया।
दिल्ली सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं बल्कि राजधानी की हवा को साफ बनाना है। सड़कों पर केवल वही वाहन चलें जो प्रदूषण मानकों पर खरे उतरते हों यही सरकार की प्राथमिकता है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में जांच और सख्त की जाएगी ताकि नियमों का सही तरह से पालन हो सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान लगातार और ईमानदारी से लागू किया गया तो दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आ सकती है। हालांकि इसके लिए जन जागरूकता और पर्याप्त पीयूसी केंद्रों की उपलब्धता भी जरूरी है। पहले दिन की हलचल से यह स्पष्ट है कि नो पीयूसी नो फ्यूल अभियान ने राजधानी में एक नई बहस और बदलाव की शुरुआत कर दी है।