Doctors welcome कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने फिजियोथेरेपिस्टों और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्टों को ‘डॉ.’ उपसर्ग का उपयोग करने से रोकने का आदेश दिया है जो चिकित्सा पेशेवर नहीं हैं। इस निर्णय का डॉक्टरों ने स्वागत किया है जो इसे मरीजों के लिए भ्रम को रोकने और चिकित्सा पेशे की एकता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।
केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी.जी. अरुण ने अपने आदेश में कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट चिकित्सा पेशेवर नहीं हैं और इसलिए उन्हें ‘डॉ.’ उपसर्ग का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह उपसर्ग केवल चिकित्सा पेशेवरों के लिए आरक्षित है जो भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत हैं। इस निर्णय को भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) और अन्य चिकित्सा संगठनों ने स्वागत किया है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली ने कहा कि यह निर्णय मरीजों के लिए भ्रम को रोकने और चिकित्सा पेशे की एकता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट इस निर्णय के खिलाफ अपील करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपने काम के लिए ‘डॉ.’ उपसर्ग का उपयोग करने के हकदार हैं और यह निर्णय उनके पेशे के लिए एक झटका है।इस बीच केरल सरकार ने कहा है कि वह इस निर्णय का समर्थन करती है और मरीजों के लिए भ्रम को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। सरकार ने यह भी कहा है कि वह फिजियोथेरेपिस्टों और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्टों के लिए एक अलग उपसर्ग का उपयोग करने पर विचार करेगी, जो उनके पेशे के लिए उपयुक्त हो।