नई दिल्ली :- फिल्म धुरंधर की सफलता ने बॉक्स ऑफिस से लेकर सोशल मीडिया तक तहलका मचा दिया है। आमतौर पर किसी फिल्म के हिट होते ही सारा श्रेय निर्देशक या मुख्य कलाकारों को मिल जाता है लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। धुरंधर की शानदार सफलता के पीछे एक ऐसी बिजनेस वुमन का दिमाग काम कर रहा है जिसने पर्दे के पीछे रहकर पूरा खेल बदल दिया।
यह फीमेल प्रोड्यूसर न सिर्फ फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझती हैं बल्कि बाजार की नब्ज पकड़ने में भी माहिर मानी जाती हैं। उन्होंने धुरंधर को केवल एक फिल्म की तरह नहीं देखा बल्कि इसे एक मजबूत ब्रांड के रूप में पेश किया। स्क्रिप्ट के चयन से लेकर स्टार कास्ट मार्केटिंग और रिलीज रणनीति तक हर फैसले में उनकी स्पष्ट सोच दिखाई देती है।
सूत्रों के मुताबिक इस बिजनेस वुमन ने फिल्म की कहानी पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उनका मानना था कि अगर कंटेंट मजबूत होगा तो दर्शक खुद ही फिल्म को आगे बढ़ाएंगे। यही वजह है कि धुरंधर की स्क्रिप्ट पर लंबा वक्त लगाया गया और किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया। उन्होंने नए और अनुभवी कलाकारों का ऐसा संतुलन बनाया जिससे फिल्म हर वर्ग के दर्शकों से जुड़ सकी।
मार्केटिंग के मामले में भी उनका नजरिया अलग रहा। पारंपरिक प्रमोशन के साथ साथ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया। फिल्म के किरदारों और डायलॉग्स को रिलीज से पहले ही चर्चा में लाया गया जिससे दर्शकों की उत्सुकता बनी रही। रिलीज के बाद भी पब्लिक रिव्यू और वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म को और मजबूती दी।
बॉलीवुड में जहां अब भी पुरुष प्रधान सोच हावी मानी जाती है वहीं इस बिजनेस वुमन ने यह साबित कर दिया कि सही दृष्टि और साहस के साथ महिलाएं भी बड़े प्रोजेक्ट्स को सफल बना सकती हैं। उनकी रणनीति और निर्णय क्षमता ने धुरंधर को सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं बल्कि एक यादगार प्रोजेक्ट बना दिया।
आज धुरंधर की सफलता को देखकर यह साफ कहा जा सकता है कि पर्दे के पीछे काम करने वाले दिमाग भी उतने ही अहम होते हैं जितने कैमरे के सामने दिखने वाले चेहरे। इस बिजनेस वुमन की सोच और मेहनत आने वाले समय में कई नए फिल्ममेकर्स के लिए प्रेरणा बन सकती है।