पटना (बिहार):- बिहार सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। अब एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए बिहार को केंद्र सरकार की मंजूरी और सहायता का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने खुद के स्तर पर पांच बड़े एक्सप्रेस वे बनाने का निर्णय किया है। इस फैसले को बिहार के विकास की रफ्तार बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
सरकार उत्तर प्रदेश मॉडल को अपनाते हुए एक विशेष एक्सप्रेस वे अथॉरिटी का गठन करने जा रही है। यह अथॉरिटी परियोजनाओं की योजना निर्माण भूमि अधिग्रहण टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य की निगरानी करेगी। इससे निर्णय लेने में तेजी आएगी और परियोजनाएं तय समय पर पूरी की जा सकेंगी। अब तक केंद्र पर निर्भरता के कारण कई सड़क परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती थीं।
इन प्रस्तावित एक्सप्रेस वे से राज्य के प्रमुख शहरों को जोड़ा जाएगा। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा बल्कि व्यापार और उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बिहार में नई औद्योगिक संभावनाएं पैदा होंगी। खासकर सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने में यह योजना अहम भूमिका निभाएगी।
सरकार का मानना है कि एक्सप्रेस वे बनने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। निर्माण कार्य के दौरान हजारों लोगों को काम मिलेगा और बाद में परिवहन पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ेगा। इसके साथ ही कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी आसानी होगी।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था भी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। जरूरत पड़ने पर निजी भागीदारी को भी शामिल किया जा सकता है। पारदर्शिता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
कुल मिलाकर यह फैसला दिखाता है कि बिहार अब आत्मनिर्भर होकर विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। एक्सप्रेस वे परियोजनाएं राज्य की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं और आने वाले वर्षों में बिहार को तेज रफ्तार विकास की दिशा में ले जा सकती हैं।