नई दिल्ली :- हवाई यात्रा को तेज और सुविधाजनक माना जाता है लेकिन कई बार फ्लाइट के लेट या कैंसिल होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बहुत से लोग अपने अधिकारों से अनजान रहते हैं और एयरलाइंस की शर्तों के आगे मजबूर हो जाते हैं। जबकि DGCA ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नियम बनाए हैं जिनका लाभ हर यात्री उठा सकता है।
अगर आपकी फ्लाइट निर्धारित समय से एक या दो घंटे देरी से चलती है तो एयरलाइन की जिम्मेदारी बनती है कि वह आपको समय की जानकारी देती रहे। दो घंटे से अधिक देरी होने पर यात्रियों को मुफ्त चाय नाश्ता या भोजन उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। यह सुविधा उड़ान के समय और दूरी के अनुसार तय की जाती है।
यदि फ्लाइट छह घंटे या उससे ज्यादा देर से रवाना होती है तो यात्री को दो विकल्प दिए जाते हैं। पहला विकल्प वैकल्पिक उड़ान का होता है जिससे यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच सके। दूसरा विकल्प पूरा रिफंड लेने का होता है। इस स्थिति में एयरलाइन कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं काट सकती।
रात के समय या लंबी देरी की स्थिति में एयरलाइंस को होटल में ठहरने की व्यवस्था भी करनी होती है। इसके साथ ही होटल तक आने जाने की सुविधा देना भी उनकी जिम्मेदारी है। यह नियम खासतौर पर तब लागू होता है जब देरी एयरलाइन की वजह से हुई हो।
अगर फ्लाइट पूरी तरह से रद्द कर दी जाती है तो यात्रियों को पूरा रिफंड या वैकल्पिक फ्लाइट का अधिकार मिलता है। इसके अलावा कुछ मामलों में मुआवजे का भी प्रावधान है। हालांकि मौसम खराब होने या सुरक्षा कारणों से रद्द हुई फ्लाइट पर मुआवजा लागू नहीं होता।
यात्रियों को चाहिए कि वे टिकट और बोर्डिंग पास संभालकर रखें और जरूरत पड़ने पर एयरलाइन काउंटर या कस्टमर केयर से संपर्क करें। अगर फिर भी समस्या का समाधान न हो तो DGCA की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। जागरूक यात्री ही अपने अधिकारों की सही रक्षा कर सकता है।