राहुल गांधी के विदेशी बयान पर सियासी घमासान तेज

 

नई दिल्ली :- कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जर्मनी में दिए गए बयान के बाद भारतीय राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में भारत के चुनावी तंत्र को लेकर सवाल उठाए और गड़बड़ी की बात कही। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे देश की छवि खराब करने की कोशिश बताया है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी बार बार विदेशी मंचों से भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों पर सवाल उठाते हैं। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस को देश की प्रगति और मजबूत लोकतंत्र से नफरत है। बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस देश में अराजकता और भ्रम फैलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास है।

बीजेपी का यह भी कहना है कि भारत में चुनाव पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराए जाते हैं। दुनिया भर में भारतीय चुनाव प्रक्रिया की सराहना होती रही है। ऐसे में विदेश जाकर देश के चुनावी तंत्र पर संदेह जताना न केवल गलत है बल्कि देश की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी से सवाल किया कि अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो वे उसे देश के भीतर उठाएं न कि विदेशी धरती पर।

वहीं कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी ने लोकतंत्र को मजबूत करने की बात कही है और उनकी मंशा किसी संस्था को बदनाम करने की नहीं है। उनका तर्क है कि सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है और इससे सुधार की गुंजाइश बनती है। हालांकि बीजेपी इसे केवल राजनीतिक हथकंडा बता रही है।

इस बयान के बाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है क्योंकि चुनावी माहौल में ऐसे बयान राजनीतिक तापमान को और बढ़ा देते हैं। साफ है कि राहुल गांधी के इस बयान ने सत्तारूढ़ और विपक्ष के बीच टकराव को और गहरा कर दिया है।

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