फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश):- फिरोजाबाद शहर की एक बदनाम गली अब अपनी पुरानी पहचान से जूझ रही है। वर्ष फरवरी 2015 में सामने आए एक गंभीर मामले ने इस गली की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। एक युवती को लंबे समय तक बंधक बनाकर उससे जबरन गलत धंधा कराया जा रहा था। जब इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन तक पहुंची तब तत्काल कार्रवाई की गई। छापेमारी के बाद युवती को मुक्त कराया गया और गली को पूरी तरह बंद कर दिया गया।
उस समय प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सात मकानों को सील कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद गली में रहने वाले लोगों का जीवन पूरी तरह बदल गया। बदनामी और डर के कारण बीस से अधिक परिवार अपने घरों पर ताले लगाकर मुंबई स्थानांतरित हो गए। वर्षों से बंद पड़ी इस गली में अब सन्नाटा पसरा हुआ है। कई मकान जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं और वहां किसी तरह की नियमित गतिविधि नहीं दिखाई देती।
हाल ही में हुए एसआइआर सर्वे के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। इस गली से दो सौ से अधिक वोटर रिकॉर्ड से गायब पाए गए। इससे प्रशासन भी हैरान है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब परिवार पलायन कर गए तो उनके नाम मतदाता सूची में बने रहना या अचानक गायब हो जाना दोनों ही चिंता का विषय है।
गली के आसपास रहने वाले लोग अब चाहते हैं कि इस स्थान की पहचान बदली जाए। उनका मानना है कि बदनाम नाम के कारण क्षेत्र की छवि आज भी खराब बनी हुई है। लोगों ने प्रशासन से गली का नाम बदलने की मांग की है ताकि नई शुरुआत हो सके।
इस पूरे मामले की जड़ में वह युवती थी जो बिहार के नौरंगा खगड़िया की रहने वाली थी। वह करीब चार साल तक इस गली में कैद रही और अमानवीय परिस्थितियों का सामना करती रही। फरवरी 2015 में शिकायत दर्ज होने के बाद ही उसे आजादी मिल सकी।
यह गली अब अपराध की नहीं बल्कि सामाजिक पीड़ा और प्रशासनिक फैसलों की गवाह बन चुकी है। लोग चाहते हैं कि यहां फिर से सामान्य जीवन लौटे और यह इलाका डर की जगह उम्मीद की पहचान बने।