जयपुर (राजस्थान):- राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के दस्तावेज अधूरे रह जाने का मामला सामने आया है। यह अभियान मतदाता सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से चलाया गया था। राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में घर घर जाकर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में कई ऐसे मतदाता पाए गए जिनके पहचान संबंधी कागज पूरे नहीं थे।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अभियान के दौरान लाखों मतदाताओं की जानकारी का मिलान किया गया। इसमें यह स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में लोगों के पास या तो पहचान पत्र उपलब्ध नहीं थे या फिर प्रस्तुत दस्तावेजों में आवश्यक विवरण दर्ज नहीं था। कई मामलों में नाम की वर्तनी जन्मतिथि और पते से जुड़ी त्रुटियां भी सामने आईं।
ग्रामीण इलाकों में समस्या अधिक गंभीर देखी गई। यहां लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र या स्थायी पते का प्रमाण नहीं था। वहीं शहरी क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों और किराये पर रहने वाले परिवारों के दस्तावेज अधूरे पाए गए। कई लोगों ने यह भी बताया कि उन्हें सत्यापन प्रक्रिया की पूरी जानकारी समय पर नहीं मिल सकी।
राज्य निर्वाचन विभाग ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। विभाग का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटे यह उद्देश्य नहीं है। जिन लोगों के कागज अधूरे रह गए हैं उन्हें सुधार का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए विशेष शिविर लगाए जाने की योजना बनाई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दस्तावेजों की कमी सामाजिक और आर्थिक कारणों से जुड़ी है। जागरूकता की कमी और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता भी एक बड़ा कारण है। यदि समय रहते सुधार की सुविधा दी जाए तो यह समस्या आसानी से हल हो सकती है।
कुल मिलाकर राजस्थान में एसआईआर अभियान ने एक बड़ी सच्चाई को उजागर किया है। अब जरूरत है कि प्रशासन और नागरिक मिलकर इस कमी को दूर करें ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हर योग्य व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।