नवी मुंबई :- नवी मुंबई में शहर और औद्योगिक विकास निगम यानी सिडको में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले 11 वर्षों में एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने सिडको के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कुल 21 ट्रैप कार्रवाई की है। ये मामले रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े हैं जिसने सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
ACB की कार्रवाई में जूनियर इंजीनियर से लेकर सीनियर अधिकारियों तक के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि प्लॉट आवंटन भवन निर्माण की मंजूरी लीज ट्रांसफर और फाइल पास कराने जैसे कामों के लिए खुलेआम रिश्वत मांगी जाती थी। कई मामलों में शिकायतकर्ताओं ने रिकॉर्डिंग और ठोस सबूतों के साथ ACB से संपर्क किया जिसके बाद जाल बिछाकर आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा गया।
सूत्रों के अनुसार सिडको में लंबे समय से रिश्वतखोरी एक संगठित तरीके से चल रही थी। अलग अलग विभागों में काम कराने के लिए दलालों का नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है। शिकायत न करने वालों के काम जानबूझकर रोके जाने के भी आरोप लगे हैं जिससे आम नागरिक और बिल्डर वर्ग दोनों परेशान रहे।
ACB अधिकारियों का कहना है कि 11 साल में 21 ट्रैप यह दिखाने के लिए काफी हैं कि समस्या गहरी है। हर कार्रवाई के बाद विभागीय जांच और निलंबन की प्रक्रिया जरूर हुई लेकिन इसके बावजूद भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई। इसी वजह से अब निगरानी और सख्त करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सिडको प्रशासन की ओर से कहा गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। आंतरिक सतर्कता तंत्र को मजबूत करने और ऑनलाइन प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो सके।
यह मामला नवी मुंबई के विकास से जुड़े एक अहम संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि लगातार हो रही ACB कार्रवाई के बाद सिस्टम में वास्तविक सुधार होता है या नहीं।