न्यूजीलैंड :- न्यूजीलैंड में एक विवादित घटना में सिख समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया गया। दक्षिणपंथी समूहों ने रैली आयोजित कर सिखों के खिलाफ नारों के साथ प्रदर्शन किया और कहा कि “यह भारत नहीं है”। उनका तर्क था कि वे स्थानीय रीति‑रिवाज और नियमों के अनुरूप रहना चाहते हैं, लेकिन इस तरीके से उन्होंने सिख समुदाय की धार्मिक पहचान पर हमला किया।
स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर और झंडे लेकर सिखों के खिलाफ नारे लगा रहे थे। सिख समुदाय के लोग इस घटना से नाराज और भयभीत हैं। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से न्यूज़ीलैंड में शांति और सम्मान के साथ रह रहे हैं और उनके खिलाफ इस तरह का भड़काऊ प्रदर्शन अस्वीकार्य है।
स्थानीय अधिकारियों ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया। पुलिस ने स्थिति को काबू में रखा और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कार्रवाई की। प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन बढ़ती असहिष्णुता और सांप्रदायिक तनाव का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि न्यूज़ीलैंड जैसे लोकतांत्रिक देशों में हर समुदाय को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ सुरक्षित रहने का अधिकार होना चाहिए।
सिख संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मदद की अपील की है ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक भेदभाव को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाज में सहिष्णुता और सम्मान बनाए रखना कितना जरूरी है।