नई दिल्ली :- साल 1989 में चीन की राजधानी बीजिंग का तियानमेन चौक इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में दर्ज हो गया। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर सैन्य कार्रवाई ने दुनिया को हिला दिया था। इसी घटना से जुड़ा एक ऐसा सच अब सामने आया है जो सत्ता के आदेशों के बीच खड़े साहस और नैतिकता की मिसाल पेश करता है। 35 साल बाद लीक हुए कोर्ट मार्शल के वीडियो ने उस कमांडर की कहानी उजागर की है जिसने छात्रों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था।
यह कमांडर थे जनरल जू किनक्सियन। जब उन्हें अपने सैनिकों को निहत्थे नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल करने का आदेश मिला तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उनके लिए सैन्य अनुशासन से बड़ा मानव जीवन और नैतिक जिम्मेदारी थी। इसी फैसले की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी। जनरल जू को कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा और उनका सैन्य करियर वहीं खत्म कर दिया गया।
लीक हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह उनसे बार बार पूछा गया कि उन्होंने आदेश क्यों नहीं माना। हर सवाल के जवाब में उनका स्वर शांत लेकिन दृढ़ नजर आता है। वे कहते हैं कि सेना का काम देश की रक्षा करना है न कि अपने ही लोगों पर हथियार उठाना। यह बयान उस दौर में असाधारण साहस का प्रतीक था।
तियानमेन चौक नरसंहार को लेकर चीन में आज भी खुलकर चर्चा नहीं होती। इस घटना से जुड़े कई तथ्य दबे रहे और अनेक आवाजें खामोश कर दी गईं। ऐसे में यह वीडियो सामने आना इतिहास की परतों को खोलने जैसा है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं बल्कि उस नैतिक संघर्ष की गवाही है जो सत्ता और इंसानियत के बीच लड़ा गया।
जनरल जू किनक्सियन की यह कहानी आज की पीढ़ी को यह सोचने पर मजबूर करती है कि कठिन समय में सही और गलत के बीच चुनाव कितना महंगा हो सकता है। फिर भी कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इतिहास में हथियार नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों के लिए याद किए जाते हैं।