China Risk नई दिल्ली:- भारत ने नवंबर 2019 में आरसीईपी (प्रादेशिक व्यापक आर्थिक भागीदारी) से बाहर निकलने का फैसला किया था लेकिन अब उसने चीन को छोड़कर आरसीईपी के सभी सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते करके इसके फायदे हासिल कर लिए हैं। भारत ने हाल ही में न्यूजीलैंड के साथ एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए है जिससे वह आरसीईपी के सभी देशों के साथ व्यापार समझौते करने वाला पहला देश बन गया है, चीन को छोड़कर।
भारत की इस रणनीति को “आरसीईपी माइनस चीन” कहा जा रहा है जिसका उद्देश्य चीन के साथ व्यापारिक जोखिमों से बचते हुए आरसीईपी के फायदे हासिल करना है। भारत के इस कदम को एक स्मार्ट व्यापारिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है जो उसे अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करने और चीन के साथ व्यापारिक असंतुलन को कम करने में मदद करेगी।
भारत ने आरसीईपी से बाहर निकलने का फैसला इसलिए किया था क्योंकि उसे लगता था कि आरसीईपी में चीन की भागीदारी से भारतीय उद्योगों को नुकसान हो सकता है और चीन को भारतीय बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। भारत ने आरसीईपी के बजाय द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया, जिससे वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा कर सके और चीन के साथ व्यापारिक जोखिमों से बच सके।