नई दिल्ली :- रांची में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे के दौरान सुरक्षा में चूक की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं। वायरल वीडियो और दावों ने लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। हालांकि प्रशासन की जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह मामला पूरी तरह अफवाह पर आधारित था और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं हुई थी।
सोशल मीडिया पर जो वीडियो साझा किया गया उसमें एक स्कूटी सवार व्यक्ति राष्ट्रपति के काफिले के पास दिखाई दे रहा था। कई लोगों ने इसे सुरक्षा चूक बताकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सच्चाई यह है कि वीडियो में नजर आ रहा व्यक्ति स्पेशल ब्रांच का जवान था जो अपनी निर्धारित ड्यूटी निभा रहा था। वह किसी भी तरह से अनधिकृत व्यक्ति नहीं था और न ही उसने सुरक्षा घेरा तोड़ा था।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति का मुख्य काफिला उस स्थान से पहले ही गुजर चुका था। स्कूटी सवार जवान को सुरक्षा प्रबंधन के तहत आगे की व्यवस्था देखने के लिए तैनात किया गया था। वीडियो को संदर्भ से अलग दिखाकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया जिससे अफवाहों को बल मिला।
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे बिना पुष्टि के किसी भी खबर पर विश्वास न करें। राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की सुरक्षा को लेकर की गई भ्रामक पोस्ट न केवल गलत सूचना फैलाती हैं बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी वीडियो या संदेश की सच्चाई जाने बिना उसे साझा करना खतरनाक हो सकता है। इससे समाज में डर और अविश्वास का माहौल बनता है। रांची की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हर वायरल खबर सच नहीं होती।
अंत में यह साफ है कि राष्ट्रपति मुर्मु की सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई थी। पूरा मामला गलतफहमी और अफवाह का परिणाम था। जनता की जिम्मेदारी है कि वह संयम से काम ले और केवल विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करे।