नई दिल्ली :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शांति और संवाद का मजबूत संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि रशियन फेडरेशन के राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाए जाने की खबरें अत्यंत चिंताजनक हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब विश्व के कई क्षेत्र तनाव और संघर्ष से गुजर रहे हैं। प्रधानमंत्री का स्पष्ट मत है कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और इससे हालात और अधिक जटिल हो जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि चल रही कूटनीतिक पहलें ही दुश्मनी को समाप्त करने और स्थायी शांति प्राप्त करने का सबसे प्रभावी मार्ग हैं। उनका मानना है कि संवाद और आपसी समझ से ही विश्वास बहाल किया जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे शांति प्रयासों को प्राथमिकता दें और ऐसे किसी भी कदम से दूर रहें जो इन प्रयासों को कमजोर करता हो।
भारत लंबे समय से वैश्विक मंच पर शांति सहअस्तित्व और बातचीत का समर्थक रहा है। प्रधानमंत्री का यह संदेश उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है। भारत का दृष्टिकोण हमेशा यह रहा है कि युद्ध और टकराव से मानवता को नुकसान होता है जबकि सहयोग और संवाद से विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस बयान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्व है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत जिम्मेदार वैश्विक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री का संदेश केवल एक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक नैतिक अपील है जो विश्व समुदाय को संयम और विवेक अपनाने की याद दिलाती है।
आज के अस्थिर वैश्विक माहौल में ऐसे संदेश उम्मीद की किरण बनते हैं। यह स्पष्ट करता है कि शांति के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं और हर राष्ट्र को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश विश्व को यह याद दिलाता है कि संवाद ही सबसे मजबूत हथियार है।