नई दिल्ली :- सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज अभिव्यक्ति का बड़ा माध्यम बन चुके हैं। इसके साथ ही अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार भी तेजी से बढ़ा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए मोदी सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि ऑनलाइन मंचों पर अश्लीलता फैलाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ साथ आईटी मंत्रालय ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी को और सख्त कर दिया है। नए दिशा निर्देशों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री को समय रहते हटाएं। यदि कोई प्लेटफॉर्म नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मानना है कि अश्लील सामग्री का सीधा असर युवाओं और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इससे सामाजिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है और अपराध की प्रवृत्ति भी बढ़ती है। इसी कारण साइबर कानूनों को मजबूत किया जा रहा है ताकि दोषियों को कड़ी सजा दी जा सके। पुलिस और साइबर सेल को भी तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा रहा है।
मोदी सरकार ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अश्लील और भ्रामक सामग्री को न फैलाएं और ऐसे अकाउंट की शिकायत करें। इसके लिए हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल को सक्रिय किया गया है। सरकार का उद्देश्य किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकना नहीं है बल्कि समाज को सुरक्षित और स्वस्थ डिजिटल वातावरण देना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम डिजिटल भारत की दिशा में एक जरूरी पहल है। यदि नियमों का सख्ती से पालन किया गया तो सोशल मीडिया एक सकारात्मक मंच बन सकता है। आने वाले समय में सरकार की यह कार्रवाई ऑनलाइन दुनिया में अनुशासन और जिम्मेदारी दोनों को मजबूत करेगी।