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सोनभद्र में 30 मई हिन्दी पत्रकारिता के उद्द्भव पर विशेष, सभी पत्रकार बंधुओं को हिन्दी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए

विवेक मिश्रा की स्पेशल रिपोर्ट

सोनभद्र ( उत्तर प्रदेश):- हिन्दी पत्रकारिता के समस्त संस्थान व स्तम्भ हो चुके सभी मार्गदर्शक, अग्रज, मित्र, एवं नवांकुरित पत्रकार बंधुओं को हिन्दी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए।लगभग दो शताब्दी पूर्व ब्रिटिश कालीन भारत, जब तत्कालीन हिंदुस्तान में दूर दूर तक मात्र अँग्रेजी, फ़ारसी, उर्दू एवं बांग्ला भाषा में अखबार छपते थे, तब देश की राजधानी कलकता के कोलू टोला नामक मोहल्ले की 37 नंबर आमड़तल्ला गली से उत्तरप्रदेश शहर कानपुर के मूल निवासी अधिवक्ता पं. जुगल किशोर शुक्ल जी ने अंग्रेजों की नाक के नीचे हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास की आधारशिला रखी, जिसपर आज हम सभी ने भव्य भवन खड़े किए है।

 

उस आधारशिला का नाम उदन्त मार्तण्ड था।उदन्त मार्तण्ड का शाब्दिक अर्थ ‘समाचार सूर्य’ या ‘बाल सूर्य’ होता है।ये सप्ताहिकी जिसने अंग्रेजों की नाक में इस कदर खुजली कर दी की उसका प्रकाशन डेढ़ वर्ष से अधिक न हो सका।इस साप्ताहिक के प्रकाशक एवं संपादक आदरणीय शुक्ल जी ने आज ही के दिन 30 मई 1826 को उदन्त मार्तण्ड का पहला अंक प्रकाशित किया था।

जिसके परिणामस्वरूप आज का दिन हिन्दी पत्रकारिता का उद्भव कहलाया, और हम आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस बनाते है | प्रत्येक मंगलवार को प्रकाशित होने वाले इस साप्ताहिक अखबार में उदन्त मार्तण्ड में हिन्दी भाषा के बृज और अवधी भाषा का मिश्रण होता था। पत्र वितरण में अंग्रेज़ों द्वारा लगातार डाक शुल्क में छूट न दिये जाने के कारण इसका 79वां और आखिरी अंक दिसंबर 1827 में प्रकाशित हुआ। इस समाचार पत्र के पहले अंक की 500 प्रतियाँ प्रकाशित हुयी थी।

उस समय अंग्रेजी, फारसी और बांग्ला में तो अनेक पत्र निकल रहे थे किन्तु हिंदी में एक भी पत्र नहीं निकलता था। इसलिए उदंत मार्तड का प्रकाशन शुरू किया गया था।पत्रकारिता आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है जिसमें समाचारों का एकत्रीकरण, लिखना, जानकारी एकत्रित करके पहुँचाना, सम्पादित करना और सम्यक प्रस्तुतीकरण आदि सम्मिलित हैं। आज के युग में पत्रकारिता के भी अनेक माध्यम हो गये हैं; जैसे – अखबार, पत्रिकायें, रेडियो, दूरदर्शन, वेब-पत्रकारिता आदि। बदलते वक्त के साथ बाजारवाद और पत्रकारिता के अंतर्संबंधों ने पत्रकारिता की विषय-वस्तु तथा प्रस्तुति शैली में व्यापक परिवर्तन किए।

पत्रकारिता शब्द अंग्रेजी के जर्नलिज़्म का हिन्दी रूपान्तर है। शब्दार्थ की दृष्टि से जर्नलिज़्म शब्द जर्नल से निर्मित है और इसका आशय है दैनिक अर्थात जिसमें दैनिक कार्यों व सरकारी बैठकों का विवरण हो। आज जर्नल शब्द मैगजीन का द्योतक हो चला है। यानी, दैनिक, दैनिक समाचार-पत्र या दूसरे प्रकाशन, कोई सर्वाधिक प्रकाशन जिसमें किसी विशिष्ट क्षेत्र के समाचार हो।

पत्रकारिता लोकतन्त्र का अविभाज्य अंग है। प्रतिपल परिवर्तित होनेवाले जीवन और जगत का दर्शन पत्रकारिता द्वारा ही सम्भव है। परिस्थितियों के अध्ययन, चिन्तन-मनन और आत्माभिव्यक्ति की प्रवृत्ति और दूसरों का कल्याण अर्थात् लोकमंगल की भावना ने ही पत्रकारिता को जन्म दिया।

अंततः आप सभी को हिंदी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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