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दिल्ली पहुंचे नेपाल के प्रधानमंत्री, आज प्रधानमंत्री मोदी से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली:- नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड 4 दिन के भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे। आज हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल केे प्रधानमंत्री प्रचंंड के  साथ द्वितीय बैठक करेंगे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच बॉर्डर विवाद को लेकर भी चर्चा हो सकती है। इसके बाद उनके स्वागत में खास लंच भी आयोजित किया जाएगा। यात्रा के दौरान प्रचंड राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से भी मुलाकात करेंगे।

प्रचंड का ये चौथा भारतीय दौरा

नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में प्रचंड का ये चौथा भारतीय दौरा है। बुधवार को वो दोपहर करीब 3 बजे भारत पहुंचे थे। यहां भारत की संस्कृति राज्य मंत्री मिनाक्षी लेखी ने उनका स्वागत किया था। प्रचंड नई दिल्ली में नेपाल-भारत बिजनेस समिट को भी संबोधित करेंगे। प्रचंड भारत में मौजूद नेपाली समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।

नेपाल के प्रधानमंत्री के उज्जैन जाने की भी संभावना

3 जून को वो एक कार्यक्रम के लिए इंदौर जाएंगे। इसके बाद नेपाल प्रधानमंत्री महाकाली की नगरी उज्जैन जाने की भी संभावना है। नेपाल के प्रधानमंत्री इससे पहले मई में भारत आने वाले थे लेकिन कैबिनेट विस्तार के चलते उन्होंने यात्रा टाल दी थी। नेपाल में परंपरा है कि जो भी नेता वहां का प्रधानमंत्री बनता है वो अपने विदेशी यात्राओं की शुरुआत भारत से ही करता है।

2008 में राजशाही खत्म होने के बाद जब प्रचंड PM बने थे तो वो सबसे पहले चीन पहुंच थे। पिछले साल दिसंबर में पुष्प कमल दहल प्रचंड तीसरी बार नेपाल का प्रधानमंत्री बने थे। इससे पहले वो 2008 से 2009 और दूसरी बार 2016 से 2017 में प्रधानमंत्री बन चुके हैं।

प्रचंड को 2009 में PM पद से इस्तीफा देने पड़ा 

प्रचंड को चीन का करीबी माना जाता है। उन्होंने कई बार भारत विरोधी बयान भी दिए हैं। दरअसल प्रचंड को 2009 में PM पद से इस्तीफा देने पड़ा था जिसकी वजह वो भारत को मानते हैं। प्रचंड ने नेपाल आर्मी चीफ रुकमंगड़ कटवाल को पद से हटा दिया था।भारत इसके खिलाफ था।

2017 में भी प्रचंड के हाथ में सरकार की कमान रही

भारत के गतिरोध के बीच उन्हें इस्तीफा देने पड़ा।इसके बाद उनकी नजदीकियां चीन से बढ़ने लगी। इस्तीफे के बाद वो कई बार चीन के निजी दौरे पर गए। प्रचंड ने कहा था कि भारत और नेपाल के बीच जो भी समझौते हुए हैं। उन्हें खत्म कर देना चाहिए। 2016-2017 में भी प्रचंड के हाथ में सरकार की कमान रही। इस दौरान उन्होंने कहा था कि नेपाल अब वो नहीं करेगा जो भारत कहेगा।

नेपाल-भारत के बीच सीमा विवाद

पिछले साल अक्टूबर में नेपाल सरकार ने दोनों देशों की सीमा के पास भारत में बन रही एक सड़क के चौड़ीकरण पर आपत्ति जताई थी। यह सड़क बिहार के सीतामढ़ी शहर के कई इलाकों को नेपाल बॉर्डर पर भिठ्ठामोड़ और जनकपुर से जोड़ती है। इससे पहले उत्तराखंड के लिपुलेख में भारत की सड़क लंबी करने की घोषणा को लेकर नेपाल ने भार त को चेतावनी जारी करते हुए इसे तुरंत रोकने को कहा था। नेपाल उत्तराखंड स्थित लिपुलेख को अपना इलाका बता चुका है।

नेपाल की ओर से राजगुरु गजराज मिश्र ने हस्ताक्षर किए

दिसंबर 1815 में ब्रिटिश इंडिया और नेपाल के बीच एक संधि हुई थी। जिसे सुगौली संधि के नाम से जाना जाता है। इस संधि पर हस्ताक्षर तो दिसंबर 1815 में हो गए थे। लेकिन ये संधि अमल में 4 मार्च 1816 से आई। उस समय भारत पर अंग्रेजों का कब्जा था। और इस संधि पर ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ से लेफ्टिनेंट कर्नल पेरिस ब्रेडश और नेपाल की ओर से राजगुरु गजराज मिश्र ने हस्ताक्षर किए।

सुगौली संधि में ये तो तय हो गया कि नेपाल की सरहद पश्चिम में महाकाली और पूरब में मैची नदी तक होगी। लेकिन इसमें नेपाल की सीमा तय नहीं हुई थी। इसका नतीजा ये हुआ कि आज भी 54 ऐसी जगहें हैं। जिनको लेकर नेपाल और भारत के बीच में विवाद होता रहता है।   Source-ANI

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