Dastak Hindustan

‘कवच’ होता तो ओडिशा ट्रेन हादसे में नहीं होती इतनी बड़ी त्रासदी

नई दिल्ली:- ओडिशा के बालासोर में हुए भयानक ट्रेन हादसे ने एक बार फिर भारतीय रेल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े दावों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

इस मुश्किल वक्त के बीच रेलवे का वो ‘सुरक्षा कवच’ सुर्खियों में हैं। जिसका उद्घाटन पिछले साल हुआ था। दरअसल रेलवे ने अपने पैसेंजर्स की सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए ‘कवच’ का निर्माण करवाया था जिसके अस्तित्व में आने के बाद ये माना जा रहा था कि भविष्य में ट्रेन हादसों पर एक दिन जरूर लगाम लग जाएगी। ऐसी उम्मीदों के बीच बालासोर में हुई त्रासदी ने लोगों के दिलों को दहला दिया है।

 

‘कवच’ का हुआ था कामयाब परीक्षण

उस समय रेल हादसों को रोकने के लिए भारतीय रेलवे के इस कवच को मास्टर स्ट्रोक और बड़ी क्रांति माना जा रहा था। इस तकनीक के बारे में कहा जा रहा था कि रेलवे वो तकनीक विकसित कर चुका है जिसमें अगर एक ही पटरी पर ट्रेन आमने सामने भी आ जाए तो एक्सीडेंट नहीं होगा। सरकार ने तब बताया था कि इस ‘कवच’ टेक्नोलॉजी (Kavach Technology) को जल्द ही देश के सभी रेलवे ट्रैक और गाड़ियों पर इंस्टाल कर दिया जाएगा।

मार्च 2022 में हुआ था कवच टेक्नोलॉजी के ट्रायल

मार्च 2022 में हुए कवच टेक्नोलॉजी के ट्रायल में एक ही पटरी पर दौड़ रही दो ट्रेनों में से एक ट्रेन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) सवार थे और दूसरी ट्रेन के इंजन में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन खुद मौजूद थे। एक ही पटरी पर आमने सामने आ रहे ट्रेन और इंजन ‘कवच’ टेक्नोलॉजी के कारण टकराए नहीं क्योंकि कवच ने रेल मंत्री की ट्रेन को सामने आ रहे इंजन से 380 मीटर दूर ही रोक दिया और इस तरह परीक्षण सफल रहा।

 

शेयर करे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *