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दिल्ली में बाइक टैक्सी चलाने वालों के लिए बुरी खबर, ओला-उबर और रैपिडो को लगा झटका

नई दिल्ली :- दिल्ली में बाइक टैक्सी चलाने वालों के लिए बुरी खबर है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बाइक टैक्सी चलाने वालों को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दिया है जिसमें हाईकोर्ट ने दिल्ली में बाइक टैक्सी चलाने का आदेश दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर दिल्ली में बाइक टैक्सी चलाने पर रोक लग चुकी है। उबर के वकील द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि साल 2019 से ही भारत के अलग अलग राज्यों में बाइक टैक्सी सर्विस का इस्तेमाल किया जा रहा है।

फरवरी महीने में दिल्ली के परिवहन मंत्रालय ने एक नोटिस जारी किया था। नोटिस जारी कर आदेश दिया था कि दिल्ली में ओला-उबर और रैपिडो जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों की बाइक सर्विस पर रोक लगाने की मांग की थी। नोटिस जारी कर दिल्ली परिवहन विभाग ने दिल्ली में प्राइवेट बाइक टैक्सी के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर बैन लगा दिया था। इसके तहत बाइक चलाने वाले ड्राइवर का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।

इसे लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की याचिका पर केंद्र का रुख जानना चाहा है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध और न्यायमूर्ति राजेश की पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाओं की प्रति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दी जाए। उन्होंने कहा कि दोनों याचिकाओं की प्रति सॉलिसिटर जनरल को दी जानी चाहिए ताकि भारत संघ के विचारों को भी ध्यान में रखा जा सके। सॉलिसिटर जनरल मेहता इस संबंध में मोदी सरकार की ओर से पक्ष रखेंगे।

दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ ने कहा कि अंतिम नीति अधिसूचित होने तक सरकार के नोटिस पर रोक लगाने का उच्च न्यायालय का फैसला रैपिडो की याचिका को एक तरह से अनुमति देने जैसा है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार की इस बारे में पॉलिसी आने तक कैब एग्रीगेटर कंपनियों को बाइक सर्विस की इजाजत दे दी थी। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पॉलिसी तक बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

एक लाख रुपये तक का फाइन भरना पड़ता

रैपिडो को चलाने वाली रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी याचिका में कहा था कि दिल्ली सरकार का आदेश बिना किसी औचित्य के पारित किया गया। इस बारे में कोई विचार नहीं किया गया। इस साल की शुरुआत में जारी एक जनरल नोटिस में सरकार ने बाइक-टैक्सियों को दिल्ली में चलाने के खिलाफ चेतावनी दी थी और उल्लंघन करने वालों को 1 लाख रुपये तक के जुर्माने के लिए उत्तरदायी बनाया जाएगा।

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