Election result 2025 पटना:- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं और ये राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए एक ऐतिहासिक जनादेश लेकर आए हैं। मतगणना के ताज़ा रुझानों के अनुसार 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए ने 200 सीटों का जादुई आँकड़ा पार करते हुए भारी बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर रहे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए यह परिणाम गहरी निराशा लेकर आया है क्योंकि यह गठबंधन 40 सीटों के आसपास ही सिमटता नजर आ रहा है।
एनडीए की प्रचंड लहर: भाजपा सबसे बड़ी पार्टी
शुरुआती रुझानों से ही एनडीए ने जो बढ़त बनानी शुरू की थी वह दिन चढ़ने के साथ सुनामी में बदल गई। इस जीत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जो लगभग 90-95 सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (JDU) 80 से अधिक सीटों पर आगे है। इसके अलावा चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) जैसे सहयोगी दलों ने भी अपनी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए एनडीए की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी सुशासन के वादे, और महिला मतदाताओं के बीच नीतीश सरकार की योजनाओं की स्वीकार्यता ने एनडीए को यह प्रचंड जीत दिलाई है। रिकॉर्ड-तोड़ मतदान ने स्पष्ट रूप से सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में काम किया है, जिससे यह साबित होता है कि जनता ने डबल इंजन की सरकार में अपना भरोसा बरकरार रखा है।
महागठबंधन की उड़ान भरने में विफलता: तेजस्वी की मेहनत बेकार
वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को इन नतीजों से करारा झटका लगा है। महागठबंधन की सीटें 40 के नीचे सिमटती दिख रही हैं। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी थी और उनकी रैलियों में भारी भीड़ भी उमड़ी थी लेकिन ये भीड़ वोटों में तब्दील नहीं हो पाई।
महागठबंधन के ख़राब प्रदर्शन में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे बड़ा कमजोर साबित हुआ। कांग्रेस ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा उनमें से अधिकांश पर वह आगे नहीं बढ़ पाई। विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों के बंटवारे में तालमेल की कमी, स्थानीय स्तर पर कमजोर संगठन, और राजद का पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण (M-Y) भी इस बार पूरी तरह से काम नहीं कर पाया जिससे महागठबंधन की नैया डूब गई। आरजेडी जो पिछले चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी इस बार अपने अब तक के सबसे ख़राब प्रदर्शन की ओर बढ़ रही है।
क्या कहते हैं परिणाम?
ये चुनाव परिणाम स्पष्ट रूप से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की बादशाहत और भाजपा की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं। महागठबंधन, जिसने बदलाव की उम्मीद जगाई थी, वह चुनावी रणभूमि में एनडीए की संगठित और ज़मीनी रणनीति के सामने टिक नहीं पाया। एनडीए की यह ऐतिहासिक जीत न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। यह जनादेश सुशासन, विकास, और सामाजिक समीकरणों को साधने की एनडीए की रणनीति की जीत है। अब देखना यह है कि इस बंपर बहुमत के साथ नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार बिहार के लिए क्या नई दिशा तय करती है।