पटना (बिहार):- लैंड फॉर जॉब केस में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से चल रहे इस केस में यह एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन ली गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ उम्मीदवारों को रेलवे में नियुक्ति दिलाने के बदले उनके या उनके परिजनों से जमीन लालू परिवार के सदस्यों के नाम ट्रांसफर कराई गई। इन लेनदेन को नियमों के खिलाफ बताया गया है।
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और इन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोप तय किए। इससे पहले लालू परिवार की ओर से आरोप खारिज करने की मांग की गई थी लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया। अब इस मामले में गवाहों के बयान और सबूतों की जांच की जाएगी।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बता रहा है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। पार्टी नेताओं का दावा है कि सच्चाई सामने आने पर लालू परिवार को न्याय मिलेगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार आरोप तय होना यह संकेत देता है कि अदालत को मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार मिले हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि आरोपी दोषी ही साबित होंगे। अंतिम फैसला सुनवाई और सबूतों के आधार पर ही होगा।
फिलहाल इस फैसले से लालू परिवार की कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल अदालत बल्कि राजनीतिक मंच पर भी चर्चा का विषय बना रहेगा।