ईरान में विरोध प्रदर्शन की जड़ें 1979 की क्रांति से आज तक का पूरा घटनाक्रम

ईरान :- ईरान में इस समय बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। बीते दो हफ्तों से महंगाई बेरोजगारी और जीवन यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ये प्रदर्शन अब 100 से ज्यादा शहरों तक फैल चुके हैं। सरकारी आंकड़ों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक 116 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।

 

ईरान की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए 1979 की इस्लामिक क्रांति को देखना जरूरी है। इस क्रांति के बाद शाह मोहम्मद रजा पहलवी की सत्ता खत्म हुई और अयातुल्ला खोमैनी के नेतृत्व में इस्लामिक गणराज्य की स्थापना हुई। इसके बाद देश में धार्मिक नेतृत्व आधारित शासन व्यवस्था लागू हुई जिसमें सर्वोच्च नेता को सबसे अधिक शक्तियां मिलीं। शुरुआत में इस बदलाव को जनता का समर्थन मिला लेकिन समय के साथ राजनीतिक आजादी सीमित होती चली गई।

 

1980 के दशक में ईरान इराक युद्ध ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने हालात और खराब कर दिए। अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण तेल निर्यात प्रभावित हुआ और आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर पड़ा। महंगाई बढ़ती गई और रोजगार के अवसर कम होते चले गए।

 

पिछले कुछ वर्षों में ईरान में कई बार छोटे बड़े आंदोलन हुए हैं। कभी ईंधन की कीमतों को लेकर तो कभी चुनावी धांधली के आरोपों पर जनता सड़कों पर उतरी। मौजूदा विरोध प्रदर्शन भी उसी असंतोष का परिणाम हैं जो लंबे समय से भीतर ही भीतर पनप रहा था। लोग केवल महंगाई ही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और सख्त सरकारी नियंत्रण से भी नाराज हैं।

 

सरकार ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। इंटरनेट सेवाएं बाधित की गईं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आर्थिक हालात और राजनीतिक सुधारों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते तब तक ईरान में अस्थिरता बनी रह सकती है। आने वाले समय में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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